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मोदी सरकार का अहम कदम, तेल एवं गैस के बड़े भंडार मिलने के दिए संकेत

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Reported by KNEWS

Updated: Feb 11-2019 05:39:07pm
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भारत में सबसे ज्यादा ज़रुरत पेट्रोलियम और गैस की ही है। ऐसे में मोदी सरकार ने देश में शेल गैस एवं तेल भंडार की खोज का काम तेज करने की योजना बनाई है। समाचार एजेंसी रायटर्स ने उद्योग जगत के सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि संबंधित कंपनियों से इसके बारे में योजना पेश करने को कहा गया है। 

साल २०१३ में भारत ने शेल गैस एवं तेल भंडारों में अन्वेषण का अधिकार तेल एवं प्राकृतिक गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंपा था। लेकिन कई साल तक अन्वेषण कार्य करने के बाद कुछ खास परिणाम नहीं मिल पाया। सूत्रों के मुताबिक जनवरी में भारत के तेल एवं गैस नियामक हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय ने विभिन्न निजी और सरकारी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनसे अनुरोध किया था कि वे अपने पास मौजूद तेल एवं गैस ब्लॉक में शेल संसाधनों के दोहन के काम को आगे बढ़ाएं। इस बैठक में शामिल एक एग्जीक्यूटिव ने बताया की सरकार की शेल संसाधन को भारत के नक्शे पर लेकर आने की सोच है। जनवरी में होने वाली इस बैठक में कोल बेड मीथेन के विकास में लगे सभी डेवलपर्स को बुलाया गया था।

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भारत गैस की कमी वाला देश है और सालाना गैस खपत का करीब आधा हिस्सा आयात किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि देश में गैस आधारित अर्थव्यवस्था हो और देश के ऊर्जा खपत में गैस का हिस्सा मौजूदा ६.५ फीसदी से बढ़ाकर २०३० तक १५ फीसदी कर दिया जाए। 

कंपनी एग्जीक्यूटिव ने समाचार एजेंसी को बताया की एक संयुक्त ग्रुप प्लान बनाने की कोशिश की जा रही है जो जानकारी और बुनियादी ढांचे के लिए एक प्लेटफॉर्म की तरह काम करेगा और शेल गैस अन्वेषण काम को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। 

फिलहाल गैस का उत्पादन भारत में तीन कंपनियों द्वारा किया जाता है- मुकेश अंबानी के नेृतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज, रुइया ब्रदर्स की एस्सार ऑयल ऐंड गैस एक्स्पलोरेशन ऐंड प्रोडक्शन लिमिटेड तथा ग्रेट ईस्टर्न एनर्जी कॉर्प लिमिटेड। 

क्या होती है शेल गैस

कोल बेथ मीथेन को ही शेल गैस कहते हैं। शेल का मतलब होता है चट्टान इसलिए इसे शेल गैस कहते हैं। और यह चट्टान से ही निकलती है। यह गैस कोयला भंडारों के बीच पाई जाती है। इसके अलावा सार्वजनिक कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस कॉरपोरेशन के पास भी कई सीबीएम ब्लॉक हैं। फिलहाल शेल गैस का सबसे ज्यादा संभावित भंडार देश के पूर्वी हिस्से में होने का अनुमान है जिसे दामोदर वैली बेसिन कहते हैं। इस इलाके में शेल गैस का अन्वेषण कार्य शुरू होने वाला है। फिर भारत को भी गैस और तेल का आयात नहीं करना पड़ेगा।