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Thursday ,17 Jan 2019

नहीं रहा सुरक्षित एक्वीरियम जल जीवों के लिए

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Reported by KNEWS

Updated: Jan 12-2019 03:45:55pm

 उत्तराखंण्ड पर्यटन प्रदेश के नाम से जाना जाता है। सैलानीयों को सुविधा और सुन्दर पर्यटन स्थल मिले इसके लिये राज्य में करोडों रूपये सिर्फ नये पर्यटन स्थलो को विकसित करने के नाम पर खर्च कर दिए जाते है। लेकिन इसे सरकार की लापरवाही ही कहेंगे की इन पर्यटन स्थलों को एक बार बनाकर दूबारा पूछने वाला कोई नही है। ऐसा ही पर्यटक स्थल है भीमताल झील के बीच मे करोड़ों की लागत से बना ऐक्वेरियम मछलीयों का संसार अब दिन प्रति दिन बदहाल होता जा रहा है जिसकी सुध लेने वाला कोई नही। झील विकास प्राधिकरण द्वारा भीमताल झील के टापू मे एक एक्वेरियम का निर्माण कराया गया था ताकि भीमताल मे पर्यटको की सख्या मे इजाफा हो सके करोडो की लागत से बने इस एक्वेरियम को भारत का दूसरा सबसे बढा एक्वेरियम कह कर प्रचारित किया गया जिससे स्थानीय जनता मे बहुत उत्साह था और पर्यटक भी इसे देखना चहते थे लेकिन इस एक्वेरियम को देखने के लिये पर्यटको को अपनी जेब काफी डिली करनी पडती है और जो एक्वेरियम देखने पहुचते भी है तो उन्हे मछलियो की अधिक प्रजातिया देखने को नही मिल पाती है।

कुछ मछलियों के टैक खाली पडे है। लाइट जाने पर जनरेटर सुविधा भी कम है जिस कारण पर्यटक को मायूस होने पड रहा है। जिस कारण यह एक्वेरियम पर्यटको को लुभाने मे असमर्थ ही साबित हो रहा है जिससे स्थानीय जनता के रोजगार पर भी संकट मडरा रहा है स्थानीय जनता का कहना है कि भीमताल हमेशा से ही अनदेखी का शिकार रहा है और सरकार द्वारा एक्वेरियम पर करोडो रूपये खर्च करने के बाद भी स्थानीय जनता को इसका फायदा नही मिल पा रहा है प्रशासन को चाहिये की वह ऐक्वेरीयमऔर अधिक प्रचार करे और यहा पहुचने वाले पर्यटको को कम पैसो मे ऐक्वेरीयम के दर्शन कराये ताकि अधिक संख्या पर्यटक यहा पहुच सके। करोडो की लागत से भीमताल झील के बीच मे बने इस एक्वेरियम को बनने के बाद से इसे अपने हाल पर छोड दिया गया है। हांलाकि इसे बनाने के वक्त देश से ही नही विदेशो से कई प्रजाति की मछलीयां यहां लाई गई थी। जिसमें से कई तो मर गई और कई आज तक नही पहुँच पाईं।