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Wednesday ,20 Mar 2019

कमांडो से भी कठिन है नागा संन्यासी बनना

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Reported by KNEWS

Updated: Jan 12-2019 12:16:14pm

ऋषि मुनियों और आध्यात्म की नगरी प्रयागराज मे कुंभ मेला शुरू होने बस थोडा ही समय बचा है ऐसे मे अभी से सभी अखाड़े ,संत महात्मा, महामंडलेश्वर और नागा संन्यासी का डेरा प्रयागराज पहुंच चुका है ऐसे मे सबसे ज्यादा  नागा साधू लोगों के आकर्षण और जिज्ञासा का केन्द्र बने हुए है कहा जाता है नागा संयासी  ब्लैक कमांडो से भी कठिन परीक्षा देने के बाद बनते है बरसात ,गर्मी या फिर हो कडाके की ठंठ नागा संयासी निवस्त्र दिगम्बर बने रहते है और नागा संन्यासी बनाने की प्रक्रिया कुंभ और अर्द्ध कुंभ मे ही होती है नागा संन्यासी सबसे पहले जब गुरु शरण मे रहते है तो वहाँ पर उनको वो संस्कार ,संयम और  शरीर को हर तरीक़े से कठिन परिस्थितियों मे झेलने के लिए तैयार बनाये रखने की शिक्षा दी जाती है जब नागा संन्यासी के गुरू समझते है कि अब ये नागा संन्यासी बनने के लिए हर कठिन परीक्षा पार कर लेगे तो उन्हें कुंभ और अर्द्धकुंभ मे लाकर पूरे परिवार का पिंड दान कराया जाता 16 पिंडदान करने के बाद 17 वा पिंड दान खुद का करना पडता है , पिंडदान मनुष्य के मृत्यु के पश्चात होता है परंतु नागा संन्यासी को नागा बनाते समय ये पिंडदान कराया जाता है जिसके पश्चात वो व्यक्ति मृत शरीर के सामान होता है और नागा संन्यासी बना दिया जाता है नागा संन्यासियों को सनातन धर्म की रक्षा के लिए सबसे पहले शंकराचार्य जी द्वारा दीक्षा दी गई जिसके साथ ही ये परम्परा चली आरही और नागा संन्यासी दिगंबर होते है और इन्हें शिव जी का सबसे बडा सेवक कहा जाता हैं ।