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Thursday ,17 Jan 2019

गठबंधन से पहले ही सीटों पर शुरू हुआ 3- 5 का खेल

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Reported by KNEWS

Updated: Jan 12-2019 10:58:42am

राजनीति अवसरों का खेल है. यहां कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता. जो कल तक एक दूसरे की शक्ल देखना पसंद नहीं करते थे वो आज 23 साल की दुश्मनी भुलाकर एक मंच पर आने को तैयार हैं.लोकसभा चुनाव 2019 के औपचारिक शंखनाद से पहले ही उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है. यूपी में सियासी बाजी अपने नाम करने के लिए बुआ-भतीजा यानी मायावती और अखिलेश यादव ने साथ आने का मन बना लिया है और उम्मीद की जा रही है कि शनिवार को सपा-बसपा गठबंधन को लेकर औपचारिक ऐलान हो सकता है. हालांकि, अभी तक यूपी में महागठबंधन की घोषणा हुई भी नहीं कि सीटों को लेकर सहयोगियों में खींचतान की खबरें आने लगी हैं. राष्ट्रीय लोकदल के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरएलडी महागठबंधन का हिस्सा हो गया है, मगर अभी तक सीटों को लेकर सहमति नहीं बनी है. आरएलडी प्रमुख अजित सिंह ने कहा है कि उनकी पार्टी सपा-बसपा महागठबंधन का हिस्सा है, मगर अभी तक सीटों पर बात नहीं हुई है। 

 

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2 जून 1995 को प्रदेश की राजनीति में जो हुआ वह शायद ही कभी हुआ हो. उस दिन एक उन्मादी भीड़ सबक सिखाने के नाम पर बसपा सुप्रीमो की आबरू पर हमला करने पर आमादा थी. उस दिन को लेकर कई बातें होती रहती हैं। 

क्या हुआ था उस दिन

मायावती के समर्थन वापसी के बाद जब मुलायम सरकार पर संकट के बादल आए तो सरकार को बचाने के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गया. ऐसे में अंत में जब बात नहीं बनी तो सपा के नाराज कार्यकर्ता और विधायक लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्टहाउस पहुंच गए, जहां मायावती ठहरी हुईं थीं. बताया जाता है कि उस दिन गेस्ट हाउस के कमरे में बंद बसपा सुप्रीमो के साथ कुछ गुंडों ने बदसलूकी की. बसपा के मुताबिक सपा के लोगों ने तब मायावती को धक्का दिया और मुक़दमा ये लिखाया गया कि वो लोग उन्हें जान से मारना चाहते थे. इसी कांड को कहा जाता है।