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Thursday ,17 Jan 2019

गांव में रास्ता न होने के कारण ग्रामीण खेत व मकान बेचने को मजबूर

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Reported by KNEWS

Updated: Jan 11-2019 01:40:21pm

गांव के रास्ते पर दबंगों का कब्जा ग्रामीण अपने ही गांव में कैद होने को मजबूर रास्ता ना होने के चलते किसानों का सूख रहा गन्ना बच्चे नहीं जा पा रहे अपने स्कूल कई परिवार गांव छोड़कर कहीं और कर रहे अपनी गुजर-बसर शेष ग्रामीण खेत व मकान बेचकर पलायन करने को मजबूर वही मुख्यमंत्री से खेत मकान खरीदने के लिए लगाई गुहार जिलाधिकारी के आदेशों के बाद भी दबंगों ने नहीं छोड़ा अपना कब्जा उल्टा ग्रामीणों पर ही 151 के तहत दर्ज किया मुकदमा पूरी रात ग्रामीणों को रखा हवालात में जिस से आहत ग्रामीण गांव छोड़कर पलायन करने को मजबूर प्रशासन के कान पर नहीं रेंग रहा जू।  

 

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आपको बताते चलें ताजा मामला यूपी के सीतापुर ब्लाक गोंदलामऊ के लंबुआपुरवा मजरा करसेंडा का है जहां पर ग्रामीण बीते 1 साल से अपने ही गांव में कैद रहने को मजबूर हैं जिसकी शिकायत जिला अधिकारी  उप जिलाधिकारी मुख्यमंत्री इत्यादि जगह करने के बावजूद नहीं हुई कोई कार्यवाही प्रशासनिक अधिकारी खानापूर्ति कर अपना पल्ला झाड़ने में मस्त हैं वही गांव के कई परिवार गांव छोड़कर कहीं और अपना कर रहे हैं गुजर-बसर शेष बचे ग्रामीण भी खेत मकान बेचकर पलायन करने को मजबूर है वहीं प्रशासन के कान पर अभी तक जूं नहीं रेंगी है शायद कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से ग्रामीण दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं । 

 

 

 उत्तर प्रदेश के सीतापुर मे ग्रमीणो का रास्ता एक वर्षो से गॉव के कुछ दबंगो के बंद कर देने के कारण सभी ग्रामीण इतना परेशान है कि ये लोग अपना घर व खेत बेचकर पलायन करने को मजबूर है। ग्रमीणो  ने अपने मकानो पर घर बिकाऊ है के पोस्टर लगा रक्खे है।ये ग्रामीण कई महिनो से अधिकारियो के चक्कर पे चक्कर काट रहे है लेकिन इनकी फरियाद सुनने वाला कोई नही है।आरोप है कि जिला अधिकारी से लेकर पुलिस अधिकारियो कई बार शिकायत की लेकिन जॉच के नाम पर सिर्फ बेवकूफ बनाया जा रहा है।यहॉ के ग्रमीण पूरी तरह टूट चुके है।कही भी न्याय की आशा नही रह गयी है।इस लिए यहॉ के निवासी अपने खेत मकान बेच कर कही और जगह रहने को मजबूर है।

 

 

 

सीतापुर से 35 किलोमीटर दूर सदना इलाके के ये ग्रामीण इतना परेशान है।कि रासता बंद होने के कारण इन ग्रमीणो के मकान तक कोई भी समान घरो तक नही पहुच पा रहा है।इस गॉव मे रहने वाले कुछ परिवारो के बरसात के समय कच्चे मकान ढह जाने से भरे जाड़े मे खुले आसमान के नीचे गुजर बसर करने को मजबूर है।कई महिने से अधिकारियो के तहरीर पर तहरीर दे रहे है लेकिन इनकी सुनवाई कही भी नही हो रही।एक शिकायती पत्र क्षेत्र की सॉसद रेखा वर्मा को दिया गया था ।जिस पर एस डी एम मिश्रिख ने रास्ता कुछ दिन के लिए खुलवा दिया गया था.लेकिन उँची पहुच होने के कारण रास्ता गॉव के ही दबंग पुतान,सोहन, फिर से रास्ते पर अपना कब्जा जमा लिया है व ग्रामीण फिर अपने ही गांव में कैद होकर रह गए जिसके चलते आज खेत व मकान बेचकर पलायन होने को मजबूर हैं अब देखना यह है कि योगी सरकार में ऐसे पीड़ित ग्रामीणों को कब मिलेगा न्याय या ग्रामीण यूं ही दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर रहेंगे