Live Tv

Thursday ,17 Jan 2019

अयोध्या केस : 29 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

VIEW

Reported by KNEWS

Updated: Jan 10-2019 11:50:28am

एक बार फिर से अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टल गई है , सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर सुनवाई के लिए 29 जनवरी की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने जस्टिस यूयू ललित के कल्याण सिंह मामले में पेश होने का मुद्दा उठाया, जिसके बाद जस्टिस ललित ने खुद को इस केस से अलग कर लिया। अब नई बेंच का गठन 29 जनवरी से पहले सीजेआई रंजन गोगोई द्वारा किया जाएगा। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि अयोध्या विवाद पर सुनवाई संविधान पीठ ही करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज कोई सुनवाई नहीं होगी, केवल तारीख तय होगी। 5 जजों की संविधान पीठ में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे।

 

राज्यसभा में बिल पास, राष्ट्रपति की मुहर का इंतज़ार.... (आगे पढ़े)

आईएएनएस के अनुसार, राजीव धवन ने दलील दी कि अयोध्या विवाद से ही संबंधित एक मामले में न्यायमूर्ति ललित अधिवक्ता की हैसियत से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की ओर से पेश हो चुके हैं, ऐसी स्थिति में उन्हें मामले की सुनवाई से अलग हो जाना चाहिए। इसके बाद न्यायमूर्ति ललित ने सुनवाई से हटने की घोषणा कर दी। परिणामस्वरूप न्यायमूर्ति गोगोई को नयी पीठ की घोषणा के लिए आज की सुनवाई टालनी पड़ी। 

जानिये कुछ ख़ास बातें  आज की बेंच का -

1. कार्यवाही शुरू होते ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज सिर्फ तारीख और शेड्यूल होगा तय

2. जस्टिस यूयू ललित सुनवाई से हटे। जस्टिस ललित अवमानना मामले के उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के लिए पेश हो चुके थे।

3. चीफ जस्टिस आयोध्या मामले की सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की एक नयी पीठ गठित करेंगे। चीफ जस्टिस गोगोई ने मामले की सुनवाई नई बेंच बनने तक स्थगित किया।

4.  नई बेंच 29 जनवरी को इस मामले की सुनवाई करेगी। 

5.  ये है मामला- अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 30 सितंबर, 2010 के 2:1 के बहुमत के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत        में 14 अपीलें दायर की गयी हैं। 

6.  उच्च न्यायालय ने इस फैसले में विवादित भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर- बराबर बांटने का आदेश दिया था।

7.  इस फैसले के खिलाफ अपील दायर होने पर शीर्ष अदालत ने मई 2011 में उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगाने के साथ ही विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था। अब इसी मामले में सुनवाई हो रही है।