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Sunday ,16 Dec 2018

ढाई दशक के बाद भी बाबरी विध्वंस पर कहीं शौर्य दिवस तो कहीं काला दिवस

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Reported by KNEWS

Updated: Dec 06-2018 10:29:43am

6 दिसम्बर 1992 का दिन जब कारसेवको ने जय श्री राम नारा लगा कर बाबरी मस्जिद पर चढ़ गए.उसके बाद जो हुआ सब  को मालूम है. लेकिन उसके बाद से नेताओं के भाषणों में और वादों में ही राम जन्म भूमि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण की बात हुई. कितने वादे हुए कितनी सरकारे बदली लेकिन मुद्दा वही का वही रह गया. हालाँकि ढाई दशक बीतने के बाद कहीं  इतिहास के इस दिन को कोई शौर्य का प्रतीक मानकर देखा जा रहा है. तो वही दूसरी तरफ कहीं इतिहास के पन्ने में हुए दंगे से हजारों की मौत को लेकर कई लोग इसे ''काला दिन'' मानते हुए ''सविधान बचाओ'' के नारे बुलंद कर रहे है. 

 

2019 में होने वाले सबसे बड़े लोकतंत्र त्यौहार से पहले भगवान राम पर सियासत भी उबाल पर है. जिसकी झलक 24 नवम्बर से पुरे देश में देखी जा रही है. सरकार के वादे को याद दिलाने के लिए मुंबई से निकलकर अयोध्या पहुंचे  शिवेसना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी राम मंदिर निर्माण की तारीख बताने का अल्टीमेटम दे चुके है. वही  उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी और पीएम मोदी को प्रिय मानने वाले साधु संतो ने भी मुखर और कड़क रवैया अपनाते हुए मौजूदा सरकार को जल्द फैसला लेने के लिए हुंकार भर चुके है. इन सब के बिच राष्ट्रिय स्वयं सेवक ने भी रथ यात्रा निकलवाकर सरकार से कानून लाकर राम मंदिर निर्माण की बात पर जोर दे रही है. 

 

बता दे की 1993 से वीएचपी हर साल इस दिन को शौर्य दिवस के रूप में मानती है. लेकिन इस बार संगठन ने इस मौके पर नया आंदोलन शुरू करने की योजना बनाई है. 6 दिसंबर को जहां कारसेवकपुरम अयोध्या में धर्मसभा के साथ हवन पूजन के कार्यक्रम रखे गए हैं. वहीं, सभी जिलों में महाआरती कर जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की भी संगठन की योजना है.अयोध्या में विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया है कि शौर्य दिवस के मौके पर रामनगरी में मां सरस्वती की विशेष प्रार्थना की जाएगी ताकि वह लोगों की, खासकर नेताओं की राम मंदिर निर्माण के रास्ते से कोई भी बाधा हटाने में मदद करें. उन्होंने ये भी बताया कि सर्व बाधा मुक्ति हवन किया जाएगा. गोलियां खाने वाले कारसेवकों को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी.'

 

शरद के मुताबिक, हनुमान चालीसा का पाठ कर राम मंदिर निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना के साथ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन लिखे जाएंगे और मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की जाएगी. यानी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वीएचपी का 'शौर्य दिवस' सामूहिक आह्वान के तौर पर मनाया जा रहा है.विहिप जहां 6 दिसंबर को शौर्य दिवस के रूप में मना रहा है, वहीं वाम दलों का मानना है कि इस दिन बाबरी मस्जिद गिराकर संविधान और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों पर हमला किया गया था और सांप्रदायिक ताकतें हिंदुत्व की राजनीति को और धारदार बनाकर सत्ता पर काबिज रहने के सपने देख रही हैं. वाम दलों का कहना है कि राम मंदिर विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, फिर भी इसे आस्था का मामला बताकर उन्माद फैलाने की कोशिश की जा रही है. यही वजह है कि वाम दलों ने ये दिन संविधान बचाओ दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है.

 

आरएसएस द्वारा निकली गई रथ यात्रा का समापन 9 दिसम्बर को होने वाले है। वही उद्धव ठाकरे का अयोध्या में आना ,हिन्दू संघठनो और देश के साधु संतो द्वारा दी गई अल्टीमेटम से साफ जाहिर हो रहा की 6 दिसंबर, 1992 को मस्जिद गिराकर राम मंदिर निर्माण की कोशिशों का जो आगाज हुआ था, उसे अंजाम तक पहुंचाने कि लिए 2018 में इसी दिन से लड़ाई को अंतिम रूप देने का आरंभ किया जा रहा है.

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