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Sunday ,16 Dec 2018

11वां अंतराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन के समापन में गृहमंत्री ने स्वामी दयानंद को याद किया

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Reported by KNEWS

Updated: Oct 29-2018 10:14:30am

11वां अंतराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन दिल्ली के रोहणी में स्थित स्वर्ण जयंती पार्क में आयोजित किया गया. चार दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय महासम्मेलन का उद्धघाटन 24 अक्टूबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था. जिसका समापन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। समापन समारोह में गृह मंत्री ने सम्बोधित करते हुए आर्य समाज और स्वामी दयानंद के आदर्शों के बारे में बताते हुए कहा कि आर्य समाज की भूमिका लम्बे समय से भारत हीं नही पूरे विश्व कल्याण के लिए जानी जाती है। स्वामी दयानंद सरस्वती के वाक्य को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की ताकत सांस्कृतिक एक जुटता और भारतीयता है।  

 

 

राजनाथ ने भारत के ऋषि मुनियों को वसुधैव कुटुम्बकम का निर्माता बताया, औरउन्होंने कहा की, ऋषि मुनियो ने भारत के कल्याण की कामना नहीं की बल्कि सम्पूर्ण विश्व और सम्पूर्ण जाती के लिए कल्याण की कामना की है. गृह मंत्री श्री सिंह ने आर्य महासम्मेलन की तुलना राष्ट्रीय स्वयं सेवक से की और सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा की यहां आकर ऐसा लगा कि सम्मेलन में उपस्थित सभी लोग आध्यात्मिक भाव में डुबे हुए है .ये सब स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों की देन है। साथ हीं गृह मंत्री ने अपने भाषण में मंच पर शांति पाठ करने वाली भारतीय कन्याओं के साथ अफ्रिकी बच्चो द्वारा प्रस्तुत किये गए शांति पाठ की भी तारिफ की। 

 

संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि यह आर्य महा सम्मेलन समाप्त हो रहा है लेकिन जिस उद्देश्य से आर्य समाजी कार्य कर रहे हैं, उन्हें उनके उद्देश्य को प्राप्त करने से दुनिया की कोई ताकत नही रोक पाएगी। आर्य समाज के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आर्य समाज एक ऐसा क्रांतिकारी विचार है जो सोए हुए मनुष्य को भी जगा देगा। और इसका एक सूत्र है कि हम तो आर्य है हीं सारे विश्व को हम आर्य बनाना चाहते हैं। दयानंद के बारे में बोलते हुए कहा कि उनके मन और विचार इतने उच्च थे कि कल्पना करना मुश्किल है। दयानंद के आदर्श अपने से पहले दूसरों के कल्याण के बारे में सोचने का है और भारत की सबसे बड़ी विशेषता यही है। यहीं भारतीयता और भारतीय संस्कृत है। वही उन्होंने आयोजनकर्ताओं और सम्मेलन में उपस्थित लोगों को विश्वास दिलाया कि स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंति जो 2024 में आने वाली है, उस वर्ष से हर साल महासम्मेल आयोजित करने में सहयोग को  लेकर वे प्रधानमंत्री मोदीजी से बात करेंगे।  

 

इस आर्य महासम्मेलन का उद्देश्य मानव समाज और पुरी दुनिया में सभी प्रकार के समस्याओं को ध्यान में रखते हुए किया गया जिसमें मुख्य पर्यावरण की समस्या, नारी शिक्षा और उनके अधिकार , जाति –पात अंधविश्वास, असंतुलित जनसंख्या की समस्या, आर्य समाज की छह हजार संस्थाओ के संरक्षण और समाज को संगठित और एक जुट रखना है। और पुरे विश्व और मानव समाज को यह संदेश देना कि आर्य समाज सभी जाति धर्म के लोगो की क्रांति है, जिसका उद्देश्य मानव तथा राष्ट्र कल्याण करना और संगठीत रखने के साथ—साथ भारत को विश्व गुरू बनाना है।इस अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन के पहले दिन का उद्घाटन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने किया था। दूसरे दिन योग गुरु बाबा रामदेव, हिमाचल प्रदेश के गवर्नर आचार्य देवव्रत, असम के राज्यपाल जगदीश मुखी, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी द्वारा संबोधित किया गया था।