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Sunday ,16 Dec 2018

राशिफल

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आज धनलाभ की सबसे ज्यादा संभावना है इन दो राशिवालों को

आज यानि 15 दिसम्बर को हम आपको बताने जा रहे हैं की किन दो राशिवालों को है धनलाभ की सबसे ज्यादा संभावना। साथ ही क्या है आज के दिन में ख़ास।  

तो ये हैं वो राशियां: 

वृश्चिक | SCORPIO

15 दिसंबर को नौकरी कर रहे जातको के मान सम्मान में वृद्धि हो सकती है तथा नई नौकरी के ऑफर प्राप्त हो सकते हैं। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कार्य क्षेत्र से सम्बंधित यात्राएं होंगी, जो की बहुत लाभ दायक साबित होंगी। स्वास्थ्य के लिहाज से हफ्ता अच्छा बना रह सकता है।

मीन | PISCES

15 दिसंबर की सुबह से ही आपके भाग्य का भरपूर सहयोग आपके सभी कार्यों को बिना किसी तकलीफ के सम्पूर्ण करेगा। लोगों का सहयोग प्राप्त होगा। अचानक बड़ा धन लाभ मिल सकता है।

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KNEWS !1 day ago

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अंक ज्योतिष का क्या पड़ता है आपके जीवन पर प्रभाव, आईये जानते हैं

आचार्य लंकेश: जिस तरह ज्योतिष का अपना महत्व है, उसी तरह अंको का भी अपना महत्व है। अंक हमारे जीवन में विशेष महत्व रखते हैं। प्रत्येक का अंक का अपना अलग महत्व है। अंकशास्त्र के अनुसार आपको कौन सा व्यवसाय शुभ रहेगा । मूलांक एक से नौ तक माने गए हैं । अंकों के हिसाब से कुछ व्यवसाय दिये गये हैं। 


अंक 01 - अंक एक सूर्य का प्रतिनिधित्व करता है। अगर आपका मूलांक एक है, तो आप निम्न व्यवसाय चुन सकते हैं, यह आपके लिए बेहतर साबित होगा सोना, मोती, अनाज, ऊॅन, एंव दवाॅईयों आदि का व्यवसाय आपके लिए उचित रहेगा।

अंक 02 - मूल अंक दो के जातक को चन्द्रमा से संबधित क्षेत्र में सफलता मिलती है। इस अंक का स्वामी चन्द्रमा है। मूंलाक दो वाले जातकों को जनरल स्टोर, रेडीमेड कपडो, कृषि, रत्न, खिलौनो आदि का व्यापार करना चाहिए। 
 
अंक 03 - मूंलाक तीन के जातको का स्वामी बृहस्पति यानी गुरू होंता है। तीन अंक वाले जातको को लेखन, अध्यापन, स्टेशनरी, पूजा-पाठ, नौकरी कोचिंग, आदि क्षेत्र में प्रयास करना चाहिए। 

अंक 04 - मूंलाक चार का स्वामी राहू है। राहु का प्रतिनिधित्व होने से ऐसे जातको को तकनीकी कार्यो में, रेलवे, वायुवान सामाग्री, पुरातत्व, ज्योतिष, शेयर्स आदि क्षेत्र मूल अंक चार वाले जातको के लिए अच्छे होते हैं।

अंक 05 - मूंलाक पाॅच वाले जातको को आयुर्वेद, ज्योतिष, कम्प्यूटर पार्टस, वकालात, फर्नीचर के कार्य, आदि में किस्मत आजमानी चाहिए।

अंक 06 - मूंलाक छ का स्वामी शुक्र है। इसलिए इस अंक के जातक को किराना व्यापार, बेकरी, मिठाइयों आदि का व्यवसाय करना चाहिए।

अंक 07 - मूलांक सात केतु का प्रतिनिधित्व वाला क्षेत्र है। इसलिए इस अंक के जातकों को इन क्षेत्रो में व्यवसाय करना चाहिए। ट्रेवल एजेंसी, अनुसंधान, दवा, सोना आदि।

अंक 08 - मूलांक आठ वाले जातक शनि ग्रह से प्रभावित होते है। इसलिए इन जातको को शनि प्रभाव से लोहे का व्यापार, तेल, तिल, ऊन का व्यापार, नौकरी (शारीरिक श्रम वाले) आदि क्षेत्र श्रेष्ठ रहेगा। 

अंक 09 - मूलांक नौ वाले जातको को मंगल से प्रभावित क्षेत्र में कैरियर तलाशने में चाहिए। इस अंक के जातको को सेना, पुलिस, खेल, कोयले एंव धातुओं का व्यापार करना चाहिए।

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KNEWS !1 week ago

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बुधवार को गणेश जी पूजा करना अतिलाभकारी, दूर होंगे सारे संकट

आचार्य लंकेश: श्रीगणेश पूजा अपने आपमें बहुत ही महत्वपूर्ण व कल्याणकारी है। चाहे वह किसी कार्य की सफलता के लिए हो या फिर चाहे किसी कामनापूर्ति स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़े हुए दुखों के निवारण हेतु हो। 


अर्थात्‌ जब कभी किसी व्यक्ति को किसी अनिष्ट की आशंका हो या उसे नाना प्रकार के शारीरिक या आर्थिक कष्ट उठाने पड़ रहे हो तो उसे श्रद्धा एवं विश्वासपूर्वक किसी योग्य व विद्वान ब्राह्मण के सहयोग से श्रीगणपति प्रभु व शिव परिवार का व्रत, आराधना व पूजन करना चाहिए। 


श्रीगणेश चतुर्थी को पत्थर चौथ और कलंक चौथ के नाम भी जाना जाता है। यह प्रति वर्ष भाद्रपद मास को शुक्ल चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि को श्री गणपति भगवान की उत्पत्ति हुई थी इसलिए इन्हें यह तिथि अधिक प्रिय है। जो विघ्नों का नाश करने वाले और ऋद्धि-सिद्धि के दाता हैं। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक भगवान भी कहा जाता है। 

श्री गणेश पूजन की आसान विधि :


* पूजन से पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर क्रमश: पूजा करें। 


* भगवान श्रीगेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। उन्हें, शुद्ध स्थान से चुनी हुई दुर्वा को धोकर ही चढ़ाना चाहिए। 

* श्रीगणेश भगवान को मोदक (लड्डू) अधिक प्रिय होते हैं इसलिए उन्हें देशी घी से बने मोदक का प्रसाद भी चढ़ाना चाहिए। 


* श्रीगणेश के दिव्य मंत्र ॐ श्री गं गणपतये नम: का 108 बार जप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। 

* श्रीगणेश सहित प्रभु शिव व गौरी, नन्दी, कार्तिकेय सहित सम्पूर्ण शिव परिवार की पूजा षोड़षोपचार विधि से करना चाहिए। 

* व्रत व पूजा के समय किसी प्रकार का क्रोध व गुस्सा न करें। यह हानिप्रद सिद्ध हो सकता है। 


* श्रीगणेश का ध्यान करते हुए शुद्ध व सात्विक चित्त से प्रसन्न रहना चाहिए। 

* शास्त्रानुसार श्रीगणेश की पार्थिव प्रतिमा बनाकर उसे प्राणप्रति‍ष्ठित कर पूजन-अर्चन के बाद विसर्जित कर देने का आख्यान मिलता है। किन्तु भजन-कीर्तन आदि आयोजनों और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण भक्त 1, 2, 3, 5, 7, 10 आदि दिनों तक पूजन अर्चन करते हुए प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। 


* किसी भी पूजा के उपरांत सभी आवाहित देवताओं की शास्त्रीय विधि से पूजा-अर्चना करने के बाद उनका विसर्जन किया जाता है, किन्तु श्री लक्ष्मी और श्रीगणेश का विसर्जन नहीं किया जाता है। इसलिए श्रीगणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करें, किन्तु उन्हें अपने निवास स्थान में श्री लक्ष्मी जी सहित रहने के लिए निमंत्रित करें। 

* पूजा के उपरांत सभी देवी-देवताओं का स्मरण करें। हो सके तो जय-जयकार करें। अपराध क्षमा प्रार्थना करें, सभी अतिथि व भक्तों का यथा व्यवहार स्वागत करें। 


* पूजा कराने वाले ब्राह्मण को संतुष्ट कर यथा विधि पारिश्रामिक (दान) आदि दें, उन्हें प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर दीर्घायु, आरोग्यता, सुख, समृद्धि, धन-ऐश्वर्य आदि को बढ़ाने के योग्य बनें। 

भारतीय धर्म संस्कृति में किसी कार्य की सफलता हेतु पहले मंगलाचरण या फिर पूज्य देवों के वंदना की परंपरा रही है। किसी कार्य को सुचारू रूप से निर्विघ्नपूर्वक संपन्न करने हेतु सर्वप्रथम श्रीगणेश जी की वंदना व अर्चना का विधान है। इसीलिए सनातन धर्म में सर्वप्रथम श्रीगणेश की पूजा से ही किसी कार्य की शुरुआत होती है। 

जो भी भक्त भगवान गणेश का व्रत या पूजा करता है उसे श्रीगणेश प्रभु की कृपा और मनोवांछित फल की प्राप्ति अवश्य ही होती है।

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KNEWS !1 week ago

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आपकी बर्बादी का कारण बन सकती हैं ये आदतें, अगर हैं तो तुरंत बदल डालिये

कभी कभी आपको नहीं पता होता लेकिन आपकी कुछ आदते आपके जीवन पर बुरा प्रभाव डाल सकती है. धर्मिक ग्रंथों की मानें तो जीवन में कभी भी इन 5 लोगों के घर भोजन नहीं करना चाहिए नहीं तो न केवल जातक पाप का भागी बनता है बल्कि कष्ट भी झेलता है. ये हैं वो पांच लोग: 

1. जो स्त्री स्वेच्छा से पूरी तरह अधार्मिक आचरण करती हो और चरित्रहीन हो या व्याकभिचारिणी हो। गरुड़ पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति ऐसी स्त्री के यहां भोजन करता है, वह भी उसके पापों का फल प्राप्त करता है।

2. न्यायालय में जो अपराधी सिद्ध हो जाए तो उसके घर का भोजन नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार चोर के यहां का भोजन करने पर उसके पापों का असर हमारे जीवन पर भी हो सकता है।

3. किन्नरों को दान देने का विशेष विधान बताया गया है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि इन्हें दान देना चाहिए, लेकिन इनके यहां भोजन नहीं करना चाहिए। ऐसा होने पर अगले जन्म़ तक कष्ट मिलने तय होते हैं।

4. नशे के कारण कई लोगों के घर बर्बाद हो जाते हैं। इसका दोष नशा बेचने वालों को भी लगता है। ऐसे लोगों के यहां भोजन करने पर उनके पाप का असर हमारे जीवन पर भी होता है। ऐसे में इन लोगों के घर भोजन करने से बचना चाहिए।

5. जो लोग दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए अनुचित रूप से अत्यधिक ब्याज प्राप्त करते हैं, गरुड़ पुराण के अनुसार उनके घर पर भी भोजन नहीं करना चाहिए।

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KNEWS !1 week ago

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प्रदोष व्रत: प्रदोष से जुडी कुछ अहम बातें, किस वार के प्रदोष से मिलेगा क्या फल फल जानें आचार्य लंकेश से....

आचार्य लंकेश: हिन्दू धर्म में एकादशी को विष्णु से तो प्रदोष को शिव से जोड़ा गया है। हालांकि ऐसा जरूरी नहीं है। आपका ईष्‍ट कोई भी आप यह दोनों ही व्रत रख सकते हैं। जरूरी नहीं है कि प्रदोष रखते वक्त शिव की ही उपासना करें।
 

 
प्रदोष को प्रदोष कहने के पीछे एक कथा जुड़ी हुई है। संक्षेप में यह कि चंद्र को क्षय रोग था, जिसके चलते उन्हें मृत्युतुल्य कष्टों हो रहा था। भगवान शिव ने उस दोष का निवारण कर उन्हें त्रयोदशी के दिन पुन:जीवन प्रदान किया अत: इसीलिए इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा।  प्रत्येक माह में जिस तरह दो एकदशी होती है उसी तरह दो प्रदोष भी होते हैं। त्रयोदशी (तेरस) को प्रदोष कहते हैं। प्रदोष काल में उपवास में सिर्फ हरे मूंग का सेवन करना चाहिए, क्योंकि हरा मूंग पृथ्‍वी तत्व है और मंदाग्नि को शांत रखता है।

 
 
प्रदोष व्रत फल : हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष की महिमा अलग-अलग होती है। सोमवार का प्रदोष, मंगलवार को आने वाला प्रदोष और अन्य वार को आने वाला प्रदोष सभी का महत्व और लाभ अलग अलग है।
 
रविवार : जो प्रदोष रविवार के दिन पड़ता है उसे भानुप्रदोष या रवि प्रदोष कहते हैं। इस दिन नियम पूर्वक व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और लंबी आयु प्राप्त होती है। रवि प्रदोष का संबंध सीधा सूर्य से होता है। अत: चंद्रमा के साथ सूर्य भी आपके जीवन में सक्रिय रहता है। यह सूर्य से संबंधित होने के कारण नाम, यश और सम्मान भी दिलाता है। अगर आपकी कुंडली में अपयश के योग हो तो यह प्रदोष करें। रवि प्रदोष रखने से सूर्य संबंधी सभी परेशानियां दूर हो जाती है।
 
 
सोमवार : सोमवार को त्रयोदशी तिथि आने पर इसे सोम प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से इच्छा अनुसार फल प्राप्ति होती है। जिसका चंद्र खराब असर दे रहा है उनको तो यह प्रदोष जरूर नियम ‍पूर्वक रखना चाहिए जिससे जीवन में शांति बनी रहेगी। अक्सर लोग संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखते हैं।
 
मंगलवार : मंगलवार को आने वाले इस प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं। इस दिन स्वास्थ्य सबंधी तरह की समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दिन प्रदोष व्रत विधिपूर्वक रखने से कर्ज से छुटकारा मिल जाता है।
 
 
बुधवार : इस दिन को आने वाले प्रदोष को सौम्यवारा प्रदोष भी कहा जाता है यह शिक्षा एवं ज्ञान प्राप्ति के लिए किया जाता है। साथ ही यह जिस भी तरह की मनोकामना लेकर किया जाए उसे भी पूर्ण करता है। यदि आपमें ईष्‍ट प्राप्ति की इच्‍छा है तो यह प्रदोष जरूर रखें।
 
गुरुवार : इस गुरुवारा प्रदोष कहते हैं। इससे आपक बृहस्पति ग्रह शुभ प्रभाव तो देता ही है साथ ही इसे करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। अक्सर यह प्रदोष शत्रु एवं खतरों के विनाश के लिए किया जाता है। यह हर तर की सफलता के लिए भी रखा जाता है।
 
 
शुक्रवार : इसे भ्रुगुवारा प्रदोष कहा जाता है। जीवन में सौभाग्य की वृद्धि हेतु यह प्रदोष किया जाता है। सौभाग्य है तो धन और संपदा स्वत: ही मिल जाती है। इससे जीवन में हर कार्य में सफलता भी मिलती है।
 
शनिवार : शनि प्रदोष से पुत्र की प्राप्ति होती है। अक्सर लोग इसे हर तरह की मनोकामना के लिए और नौकरी में पदोन्नति की प्राप्ति के लिए करते हैं।
 
 
नोट : रवि प्रदोष, सोम प्रदोष व शनि प्रदोष के व्रत को पूर्ण करने से अतिशीघ्र कार्यसिद्धि होकर अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। सर्वकार्य सिद्धि हेतु शास्त्रों में कहा गया है कि यदि कोई भी 11 अथवा एक वर्ष के समस्त त्रयोदशी के व्रत करता है तो उसकी समस्त मनोकामनाएं अवश्य और शीघ्रता से पूर्ण होती है।

प्रदोष रखने से आपका चंद्र ठीक होता है। अर्थात शरीर में चंद्र तत्व में सुधार होता है। माना जाता है कि चंद्र के सुधार होने से शुक्र भी सुधरता है और शुक्र से सुधरने से बुध भी सुधर जाता है। मानसिक बैचेनी खत्म होती है।

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KNEWS !1 week ago

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राशिनुसार घर में लगायें ये पौधे, कुंडली के दोष और गरीबी से मिल सकता है छुटकारा

आचार्य लंकेश: मेष से मीन तक कुल 12 राशियां हैं और सभी राशियों के अलग-अलग ग्रह स्वामी हैं। पेड़-पौधे सिर्फ हरियाली ही नहीं बढ़ाते, बल्कि इनकी वजह से घर में सुख-समृद्धि भी बढ़ सकती है। ज्योतिष और वास्तु में पेड़-पौधा का काफी अधिक महत्व बताया गया है। ज्योतिष में कुल 12 राशियां बताई गई हैं। सभी राशियों के अलग-अलग ग्रह स्वामी हैं। जैसे मेष-वृश्चिक का स्वामी मंगल और मकर-कुंभ का स्वामी शनि है। कानपुर के वास्तु विशेषज्ञ आचार्य डॉ0 लंकेश जी के अनुसार राशि अनुसार शुभ पौधे घर में लगाने से कुंडली के दोष और गरीबी से मुक्ति मिल सकती है। जानिए किस राशि के लिए कौन से पौधे शुभ होते हैं. 


> मेष और वृश्चिक

मेष और वृश्चिक का स्वामी मंगल ग्रह है। इन लोगों को घर में लाल गुलाब लगाना चाहिए। शिवलिंग पर रोज लाल गुलाब चढ़ाएं।

> वृष और तुला राशि

वृष और तुला राशि के लोग ग्रह स्वामी शुक्र को प्रसन्न करने के घर में सफेद फूल वाले पौधे लगाएं। ये फूल शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए।

> कन्या और मिथुन राशि

बुध ग्रह कन्या और मिथुन राशि का स्वामी है। इन लोगों को बुध के लिए ऐसे पेड़-पौधे लगाने चाहिए, जिनका कद छोटा हो और उनमें फूल ना आते हों, लेकिन सुंदर दिखते हों।

> कर्क राशि

कर्क राशि का स्वामी चंद्र है। इन लोगों को घर में तुलसी या अन्य छोटे-छोटे औषधीय पौधे लगाना चाहिए।

> सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों को घर में लाल फूलों के पौधे लगाना चाहिए। रोज सुबह सूर्य को जल चढ़ाते समय घर में लगे लाल फूल भी लोटे में जरूर डालें।

> धनु और मीन राशि

गुरु ग्रह इन राशियों का स्वामी है। धनु और मीन राशि के लोग घर में पीले फूल वाले पौधे लगाएंगे तो फायदे में रहेंगे।

> मकर और कुंभ राशि

मकर और कुंभ राशि का स्वामी शनि ग्रह है। इन लोगों को बिना फल-फूल वाले ऐसे पौधे लगाना चाहिए,

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KNEWS !1 week ago

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कर्मो के अनुसार देते है शनि देव फल, जाने क्यों देते हैं शनि देव पीड़ा...

आचार्य लंकेश: शनि महाराज के विषय में आम धारणा है कि यह लोगों को केवल दुःख देते हैं। लेकिन सच्चाई ऐसी नहीं है, सच तो यह है कि शनि व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शुभ कर्मों के परिणाम स्वरूप जिनकी कुण्डली में शनि का शुभ योग मौजूद होता है वह बड़े ही मेहनती व्यक्ति होते हैं। यह जो भी काम करते हैं उनमें इन्हें पूरी सफलता मिलती है। समाज में प्रतिष्ठित और धन-सम्पन्न व्यक्ति होते हैं।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिनकी जन्मकुण्डली में शनि पहले, चौथे, सातवें अथवा दसवें घर में अपनी राशि मकर या कुंभ में विराजमान होता है। उनकी कुण्डली में पंच महापुरूष योग में शामिल एक शुभ योग बनता है। इस योग को शश योग के नाम से जाना जाता है। यह एक प्रकार का राजयोग है। शनि अगर तुला राशि में भी बैठा हो तब भी यह शुभ योग अपना फल देता है। इसका कारण यह है कि शनि इस राशि में उच्च का होता है।

 

माना जाता है कि जिनकी कुण्डली में यह योग मौजूद होता है वह व्यक्ति गरीब परिवार में भी जन्म लेकर भी एक दिन धनवान बन जाता है। मेष, वृष, कर्क, सिंह, तुला वृश्चिक, मकर एवं कुंभ लग्न में जिनका जन्म होता है उनकी कुण्डली में इस योग के बनने की संभावना रहती है।

अगर आपकी कुण्डली में शनि का यह योग नहीं बन रहा है तो कोई बात नहीं। आपका जन्म तुला या वृश्चिक लग्न में हुआ है और शनि कुण्डली में मजबूत स्थिति में है तब आप भूमि से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। गुरू की राशि धनु अथवा मीन में शनि पहले घर में बैठे हों तो व्यक्ति धनवान होता है।

 

 

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KNEWS !2 weeks ago

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शिवलिंग को दोनों हाथों से रगड़ें के लाभ, और शिवलिंग से जुड़ी कुछ ख़ास बातें

आचार्य लंकेश: खासतौर पर सोमवार के दिन मंदिरों में श्रृद्धालुओं का जमावड़ा उमड़ पड़ता है। अगर आप भी भगवान शिव को प्रसन्न करके आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो उनका पूजन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। जिससे आप भगवान का आशीर्वाद पा सकते हैं, तो आइए जानते आखिर वो उपाय क्या हैं|

जिससे आपको फायदा लाभ हो सके | सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय दोनों हथेलियों से रगड़ना चाहिए। इससे आपकी सोई हुई किस्मत जाग जाएगी, आपके रुके हुए सभी कार्य पूरे होते चले जाएंगे।अगर आपके पास गाड़ी नहीं है, तो आप सावन में हर रोज शिवलिंग पर पूजा करते समय चमेली के फूल चढ़ाएं और ओम नम: शिवाय का 108 बार जप करें। इससे आपकी मनोकामना पूरी होगी। 
अगर आप बिमारियों से परेशान हो चुके हैं, दवाईयों से आराम नहीं मिल रहा हो पानी में दूध तथा काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे आप बिमारियों से दूर रहेंगे लेकिन नियमित डॉक्टर को दिखाते रहें। 
घर की आर्थिक स्थिती सही नहीं है तो सावन में हर रोज शिवलिंग पर अखंडित चावल शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे भगवान शिव के साथ माता लक्ष्मीजी की भी कृपा होगी। आपके घर की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। 


अगर आपके घर में बच्चे की किलकारी नहीं गूंज रही हैं तो सावन में हर रोज शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाएं। इससे आपको लाभ होगा और संतान के सभी कार्यों में मदद भी होती है।
मेहनत करने के बाद भी अगर आपको कार्य में सफलता नहीं मिल रही है तो सावन में हर रोज पारे से शिवलिंग की पूजा करें। इससे आपको मेहनत का फल मिलने लगेगा। 
अगर आपकी कुंडली में शनि दोष है, या फिर किसी प्रकार से आपको परेशान कर रहा है तो जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, इससे आपको तुरंत राहत मिलेगी। साथ ही कुंडली में मंगल दोष है तो घर में पके हुए चावलों से भगवान शिव का श्रृंगार कर पूजा करें। इससे आपकी समस्या का अंत जरूर होगा। अगर आपके विवाह में देरी हो रही है या फिर वैवाहिक जीवन से जुड़ी परेशानी दूर करने के लिए सावन में हर रोज आप शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे आपके सभी व्यवधान तुरंत दूर होंगे।

 

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KNEWS !2 weeks ago

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आचार्य लंकेश जी की आसान अचूक, असरदार और सरल वास्तु टिप्स 

आचार्य लंकेश:

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चाहे घर छोटा हो या बड़ा किंतु वह पूर्णतया आरामदायक, मजबूत एवं शांतिप्रदायक भी होना चाहिए। यह तभी संभव है जब हम गृह-निर्माण एवं उसकी साज-सज्जा के साथ-साथ घर के वास्तु पर भी पूरा ध्यान दें ताकि ईंट-पत्थरों से बना मकान, जिसे कल हम अपना घर कहेंगे उसे किसी की बुरी नजर न लगे।

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अचूक, असरकारी और सरल वास्तु टिप्स
शहरों में स्थानाभाव के कारण छोटे-छोटे भूखंडों पर घर बनाने पड़ते हैं साथ ही शहरों में अधिक संखया में लोग फ्लैट्स में ही रहते हैं जो पहले से ही निर्मित होते हैं इसलिए घर पूरी तरह वास्तु सम्मत हो, ऐसा संभव नहीं हो पाता। चाहकर भी हम उन वास्तु दोषों को दूर नहीं कर पाते हैं और हमें उसी प्रकार उन वास्तु दोषों को स्वीकार करते हुए अपने घर में रहना पड़ता है। जैसा घर मिला, उसकी में गुजारा करना पडता है। लेकिन आप अपने घर के वास्तु दोष को कुछ आसान उपाय अपना कर ठीक कर सकते हैं....

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वास्तु के हल
घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं। इससे परिवार में प्रेम बढ़ता है। तुलसी के पत्तों के नियमित सेवन से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। घर की छत पर तुलसी का पौधा रखने से घर पर बिजली गिरने का भय नहीं रहता। घर में किसी प्रकार के वास्तु दोष से बचने के लिए घर में पांच तुलसी के पौधे लगाएं तथा उनकी नियमित सेवा करें।

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वास्तु के हल

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को हमेशा साफ-सुथरा रखें ताकि सूर्य की जीवनदायिनी किरणें घर में प्रवेश कर सकें।

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वास्तु के हल

भोजन बनाते समय गृहिणी का हमेशा मुख पूर्व की ओर होना चाहिए। इससे भोजन सुपाच्य और स्वादिष्ट बनता है। साथ ही पूर्व की ओर मुख करके भोजन करने से व्यक्ति की पाचन शक्ति में वृद्धि होती है।

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वास्तु के हल

रात को सोते वक्त व्यक्ति का सिर हमेशा दक्षिण दिशा में होना चाहिए। कभी भी उत्तर दिशा की ओर सिर करके नहीं सोना चाहिए। इससे अनिद्रा रोग होने की संभावना होती है साथ ही व्यक्ति की पाचन शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है।

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वास्तु के हल

घर में कभी-कभी नमक के पानी से पोंछा लगाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। घर से निकलते समय माता-पिता को विधिवत (झुककर) प्रणाम करना चाहिए। इससे बृहस्पति और बुध ठीक होते हैं। इससे व्यक्ति के जटिल से जटिल काम बन जाते हैं।

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वास्तु के हल

घर का प्रवेश द्वार एकदम स्वच्छ होना चाहिए। प्रवेश द्वार जितना स्वच्छ होगा घर में लक्ष्मी आने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। प्रवेश द्वार के आगे स्वस्तिक, ॐ, शुभ-लाभ जैसे मांगलिक चिह्नों को उपयोग अवश्य करें। प्रवेश द्वार पर कभी भी बिना सोचे-समझे गणेशजी न लगाएं। दक्षिण या उत्तरमुखी घर के द्वार पर ही गणेशजी लगाएं

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वास्तु के हल

विवाह पत्रिका कभी भूलकर भी न फाड़े क्योंकि इससे व्यक्ति को गुरु और मंगल का दोष लग जाता है। घर में देवी-देवताओं की ज्यादा तस्वीरें न रखें और बेडरूम में तो बिलकुल भी नहीं। शयन कक्ष में टेलीविजन कदापि न रखें क्योंकि इससे शारीरिक क्षमताओं पर विपरीत असर पड़ता है।

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वास्तु के हल

पानी उत्तर दिशा में रखें। इसमें किचन का सिंक, पाने का पानी सभी शामिल हैं। किचन में नीला रंग ना कराएं यह स्वास्थ्य की नजर से ठीक नहीं है, क्योंकि नीला रंग जहर का चिह्न है। अगर गैस पूर्व में रखना संभव ना हो, तो पश्चिम दिशा में छोटा सा आईना लगाएं। जिसमें गैस का रिफ्लेक्षन दिखायी पडे।

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वास्तु के हल

घर का मेन दरवाज़ा पूर्व या उत्तर में ही होना चाहिए किंतु यदि ऐसा न हो पा रहा हो तो घर के मुखय द्वार पर सोने चांदी अथवा तांबे या पंच धतु से निर्मित 'स्वास्तिक' की प्राण प्रतिष्ठा करवाकर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है।

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वास्तु के हल

ध्यान रहे कि घर में खिड़की दरवाजों की संखया सम हो जैसे (2, 4, 6, 8, 10) तथा दरवाजे खिड़कियां अंदर की तरफ ही खुलें। द्वार खुलते-बंद होते समय किसी भी प्रकार की कर्कश ध्वनि नहीं आनी चाहिए। ये अशुभ सूचक होता है।

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वास्तु के हल

कलह से बचने के लिए घर में किसी देवी-देवता की एक से अधिक मूर्ति या तस्वीर न रखें। किसी भी देवता की दो तस्वीरें इस प्रकार न लगाएं कि उनका मुंह आमने-सामने हो। देवी-देवताओं के चित्र कभी भी नैत्य कोण में नहीं लगाने चाहिए अन्यथा कोर्ट-कचहरी के मामलों में उलझने की पूरी संभावना रहती है। किसी को कोई बात समझाते समय अपना मुंह पूर्व दिशा में ही रखें।

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वास्तु के हल

इस बात का ध्यान रहे कि घर में कभी भी फालतू सामान, टूटे-फूटे फर्नीचर, कूड़ा कबाड़ तथा बिजली का सामान इकट्ठा न होने पाए। अन्यथा घर में बेवजह का तनाव बना रहेगा। फटे-पुराने जूते-मौजे, छाते, अण्डर गारमेंट्स आदि जितनी जल्दी हो सके घर से बाहर फैंक दें। नहीं तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का सर्वथा अभाव रहेगा और व्यर्थ की परेशानियां घेरे रहेंगी।

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वास्तु के हल

फर्नीचर का आकार गोल, त्रिकोण, षट्कोण या अण्डाकार नहीं होना चाहिए। धन वृद्धि के लिए तिजोरी का मुंह सदैव उत्तर या पूर्व दिशा में ही होना चाहिए तथा जहां पर पैसे रखने हों वहां पर सुगंधित इत्र, परफ्यूम आदि नहीं रखने चाहिए।

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वास्तु के हल

दक्षिण की दीवार पर दर्पण कभी भी न लगाएं। दर्पण हमेशा पूर्व या उत्तर की दीवार पर ही लगाना चाहिए। फ्लोरिंग, दीवार या छत आदि पर दरारे नहीं पड़नी चाहिए। यदि ऐसा है तो उन्हें शीघ्र ही भरवा देना चाहिए।

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वास्तु के हल

घर के किसी भी कोने में सीलन नहीं होनी चाहिए और न ही घर के किसी कोने में रात को अंधेरा रहना चाहिए। शाम को कम से कम 15 मिनट पूरे घर की लाइट अवश्य जलानी चाहिए। बिजली के स्विच, मोटर, मेन मीटर, टी.वी., कम्प्यूटर आदि आग्नेय कोण में ही होने चाहिए इससे आर्थिक लाभ सुगमता से होता है।

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वास्तु के हल

घर में कभी भी मकड़ी के जाले नहीं लगने चाहिए नहीं तो राहु खराब होता है तथा राहु के बुरे फल भोगने पड़ते हैं।

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वास्तु के हल

घर में कभी भी रामायण, महाभारत, युद्ध, उल्लू आदि की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। केवल शांत और सौम्य चित्रों से ही घर की सजावट करनी चाहिए।

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वास्तु के हल

घर में सीढ़ियों का स्थान पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की ओर ही होना चाहिए, कभी भी उत्तर-पूर्व में सीढ़ियां न बनवाएं। सीढ़ियों की संखया हमेशा विषम ही होनी चाहिए जैसे- 11, 13, 15 आदि। यदि घर में सीढ़ियों के निर्माण संबंधी कोई दोष रह गया हो तो मिट्टी की कटोरी से ढक कर उस स्थान पर जमीन के नीचे दबा दें। ऐसा करने से सीढ़ियों संबंधी वास्तु दोषों का नाश होता है।

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अचूक, असरदारी और सरल वास्तु टिप्स

यदि इन सब बातों का ध्यान रखा जाए तो विघ्न, बाधाएं, परेशानियां हमें छू भी नहीं सकेंगी, खुशियां हमारे घर का द्वार चूमेंगी, हमारे घर की सीढ़ियां हमारे लिए सफलता की सीढ़ियां बन जाएंगी तथा घर की बगिया हमेशा महकती रहेगी तथा घर का प्रत्येक सदस्य प्रगति करता रहेगा।

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KNEWS !2 weeks ago

खबर

पाना चाहते हैं शनि मंगल और राहु के दोषों से छुटकारा तो अपनाये ये उपाए

प्राचीन काल से मान्यता है की श्री भैरव से काल भी भयभीत रहता है और उनके भय से सब दुःख दूर भाग जाते हैं. हम सभी जानते हैं कि उनका एक रूप ‘काल भैरव’ के नाम से भी विख्यात हैं. वहीं दुष्टों का दमन करने के कारण इन्हें ‘आमर्दक’ नाम से भी पुकारा जाने लगा. कहते हैं शिव जी ने भैरव को काशी के कोतवाल पद पर प्रतिष्ठित कर दिया है और जिन व्यक्तियों की जन्मकुंडली में शनि, मंगल, राहु आदि पाप ग्रह अशुभ फलदायक हों, नीचगत अथवा शत्रु क्षेत्रीय हों. वहीं शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान हों, तो वे व्यक्ति भैरव अष्टमी अथवा किसी माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी से प्रारंभ कर बटुक भैरव मूल मंत्र की एक माला (108 बार) का जाप प्रतिदिन रूद्राक्ष की माला से 40 दिन तक करें, अवश्य ही शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है.

किस मंत्र का करे जाप 

मंत्र-  ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।’ कहा जाता है जब कोई भी जातक शनि, मंगल या राहु के अशुभ परिणाम प्राप्त कर रहा हो तो उसे हर दिन सही ढंग से इस मंत्र का पाठ करना चाहिए माना  जाता है इस मंत्र के उच्चारण से जातक को लाभ होता है. 

वहीं जब कोई भी जातक शनि, मंगल या राहु के अशुभ परिणाम भोग रहा होता है तो उसे अवश्य इस मंत्र का पाठ करना करना चाहिए जो की जातक के लिए लाभदायक होता है और यह एक चमत्कारी मंत्र है, जो कई परेशानियों से निजात दिलाने में कारगार साबित होता है. 

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